खीरों की फांकों को खिड़की से बाहर फेंकने से पहले नवाब साहब नाक के पास वासना से रसास्वादन के लिए ले गए थे। उनके इस क्रियाकलाप का उद्देश्य यह दिखाना था कि खीरा खाकर पेट भरना तो सामान्य मनुष्य का काम है। हम जैसे रईस तो उसे सूंघने मात्र से ही संतुष्ट हो जाते हैं।
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